जाति आधारित गणना सह आर्थिक सर्वेक्षण से नीति के निर्धारण करने में होगी सहूलियत।:- सुशांत यादव 
बिहार राज्य सहित पूरे देश के हित के लिए मील का पत्थर साबित होगा ।
समस्तीपुर (हसनपुर/बिथान/ सिंघिया):- केंद्र सरकार के द्वारा कराए जाने वाले जाति आधारित गणना सह आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकारों को लोककल्याणकारी नीति के निर्धारण करने में होगी सहूलियत। यह बिहार राज्य सहित पूरे देश के हित के लिए मील का पत्थर साबित होगा। उक्त बातें समस्तीपुर जिला के हसनपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित बड़गांव गांव निवासी सुशांत यादव सुमित ने कहा। उन्होंने बताया की जाति आधारित गणना सह आर्थिक सर्वेक्षण के माध्यम से समाज के आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के जीवन स्तर के उत्थान व विकास में बहुत सहूलियत होगी। सुशांत ने कहा कि बिहार राज्य में इस रिपोर्ट के जारी होते ही उसने पूरे देश को एक नई राह और दिशा दिखा दी है। बिहार में इस रिपोर्ट के जारी होने के पश्चात भारत देश के सभी राज्यों से लोगों ने बिहार सरकार के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसके समर्थन में अपनी पुरजोर वकालत करना शुरू कर दिया था। साथ ही पूरे देश के अधिकांश लोग इस बात से सहमत थे की जाति आधारित गणना समाज के सभी वर्ग के लोगों के लिए लाभकारी व जरूरी है । अब केंद्र सरकार जाति आधारित गणना सह आर्थिक सर्वेक्षण के माध्यम से आमलोगों की जाति के साथ साथ उनके आर्थिक,सामाजिक तथा शैक्षिक स्तर की जानकारी जुटा कर भविष्य की लोककल्याणकारी योजनाओं का निर्धारण कर सकेगी और सभी वर्ग के आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को प्रदान किए जाने वाले आरक्षण की सुविधा का निर्धारण वास्तविक जाति तथा आर्थिक आंकड़ों के माध्यम से तय करने में उसे सहूलियत हो पाएगी ।जाति आधारित गणना को लेकर आमलोगों को भी सकारात्मक सोच रखनी चाहिए ताकि केंद्र सरकार के इस अभियान के दूरगामी परिणाम देखने को मिल पाएगी।अभी भी समाज के बहुत सारे वर्ग के लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए बेहतर लोककल्याणकारी योजनाओं के निर्धारण की आवश्यकता है।इसके लिए जाति आधारित गणना को एक मानक मापदंड मानकर केंद्र सरकार एक तरफ बेहतर कार्ययोजनाओं के साथ सबका साथ सबका विकास व सबका विश्वास की नीति पर सफलतापूर्वक कार्य कर पाएगी, तो दूसरी तरफ वर्तमान पीढ़ी तथा आनेवाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अलग अलग प्रकार के योजनाओं का चयन हो पाएगा । कुल मिलाकर केंद्र सरकार का यह प्रयास पूरे देश के लिए हितकारी व अनुकरणीय साबित होगा।उन्होंने कहा की जाति आधारित गणना एक प्रकार का जातिगत व आर्थिक सर्वे है जिससे निश्चित रूप से समाज के पिछड़े,अति पिछड़े, दलित, महादलित सहित अल्पसंख्यक वर्ग व सामान्य वर्ग के वैसे लोगों के जीवन स्तर का उत्थान हो पाएगा जो की अब तक सामाजिक व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के माने जाते है। इस दिशा में केंद्र सरकार इस सर्वे के पश्चात समाज के वंचित तबकों के साथ साथ समाज के सभी वर्गों के लोगों को उचित आरक्षण का प्रावधान करने के लिए ठोस पहल करेगी एवम जातिगत व आर्थिक आंकड़ों के आधार पर उनके लिए लोककल्याणकारी नीति का भी निर्धारण कर पाएगी।
परशुराम कुमार की रिपोर्ट
