आत्म-स्मृति का तिलक ही विजय का, सफलता का तिलक है: सोनिका बहन

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*आत्म-स्मृति का तिलक ही विजय का, सफलता का तिलक है: सोनिका बहन*

समस्तीपुर-उजियारपुर प्रखंड के अंतर्गत प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, समस्तीपुर द्वारा रेल परिसर स्थित राम जानकी हनुमान मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय स्वर्णिम भारत नवनिर्माण आध्यात्मिक प्रदर्शनी के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में जिज्ञासुओं एवं श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा। इन दो दिनों में ही लगभग एक हजार से अधिक लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया एवं सैकड़ों की संख्या में राजयोग मेडिटेशन के लिए निःशुल्क नामांकन करवाया।
सात दिवसीय राजयोग मेडिटेशन शिविर के प्रथम दिन आत्म-स्मृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए ब्रह्माकुमारी सोनिका बहन ने कहा कि ऐसी मान्यता है कि जो माथे पर तिलक लगाते हैं उनकी कभी अकाले मृत्यु नहीं होती अर्थात् जब हम इस स्मृति में रहते हैं कि मैं ज्योति स्वरूप आत्मा मस्तक के बीचों-बीच अकालतख्त पर विराजमान हूं तो हम एक जन्म नहीं, वरन् अनेक जन्मों के लिए अकाले मृत्यु पर विजय प्राप्त कर लेते हैं। इससे जुड़ी दूसरी मान्यता है कि मस्तक पर तिलक जैसे कि माथे पर परमात्मा के चरण का स्पर्श होता है जिससे कोई भी विघ्न-बाधा हमारे आगे ठहर नहीं सकती। इसका वास्तविक अर्थ है कि स्वयं को देह नहीं आत्मा समझकर चलने से कोई भी विघ्न-बाधा हमारे आगे नहीं टिक सकती। तीसरी मान्यता है कि माथे पर तिलक लगाने से मां लक्ष्मी, मां सरस्वती की सदा कृपा बनी रहती है। इसका अर्थ है- दैहिक स्मृति को भुलाकर स्वयं को आत्मा निश्चय कर चलने से हम ज्ञान धन, गुण धन और शक्तियों के धन से सदा संपन्न रहते हैं। स्थूल धन-वैभव-संपदा की भी अनेक जन्मों तक भरपूरता रहती है। यदि हम सार में कहें तो आत्म-स्मृति का तिलक ही विजय का तिलक है, सफलता का तिलक है, विघ्न-बाधाओं को हरने का तिलक है। उन्होंने सभी से इस आत्म-स्मृति के तिलक को लगाए रखने का आह्वान किया और प्रखंड वासियों से बड़ी संख्या में रविवार को प्रदर्शनी के अंतिम दिन इसका लाभ लेने का आग्रह किया।
सात दिवसीय राजयोग मेडिटेशन शिविर दोपहर 2:00 से 3:30 बजे तक प्रतिदिन जारी रहेगा।परशुराम कुमार की रिपोर्ट

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